ख़्यबो का क्या वो तो तुझे ही दिखाती
ये तो कमब्खत नींद है, जो आती नही।

शुभ

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हम और वो

वो लहरें तो वो कश्तियां,
वो बारिश तो वो बूंदे,
वो खामोशी तो हस्सी,
वो नींद तो वो ख़्वाब,
वो दूरियां तो वो यादे
वो इंतज़ार औऱ बस वो इंतज़ार|

Internet wala pyar

Internet ne dikhya tujhe
Facebook ne milwaya tujhe
Whatsapp pe emoji exchange
Aur instagram pe posts exchange
Yahi hai mera pyar
Internet wala pyar..

Jagate hi chat ka intejar
Rato me video call pe feelings ka izhar
din me kai baar phone call intezar
Yahi hai mera pyar
Internet wala pyar

Rishte to bhot dekhe jamane ne
Kya fhayada, reh gye dusro ko jalane me
Azeeb kahaniyan hai zamne me,
Log sath reh rehkar na kar sake bharosa,
Ham durr hokar befikar hai, wo befikr hai
Yahi hai mera pyar
internet wala pyar

Dard unse pucho.. jo mile na ho kabhi dard dikhane ko..
unki hassi sunn har dard gawa dete, wo har dard gawa deti..

Shyad yahi kami hai hamare pyar me unka dard kabhi sun, ham ansoo bhi na ponch sake, aur wo ansoo bhi na ponch saki
Yahi hai mera pyar
internet wala pyar

Mann hamara bhi aur unka bhi,
ki mile ek baar..
Par ye diware hai dooriyon aur bhot si majburiyon ki..jo kardeti hame lachar..
Bas khus hu tum ho mera payar, tum ho mera pyar, karta rahunga intezar
Yahi hai mera pyar
Internet wala pyar

अलविदा!

बहुत गुरुर से अलविदा कह दिया ,अलविदा तो कह दिया फिर मुड़ मुड़ कर क्यों देखते हो।

खुद ही अलविदा कहा, फिर क्यों हर शाम इंतेज़ार करते हो।

आओ इस अलविदाई का जश्न मनाये, क्योंकि सफर लंबा है अफसोस का।

शुभम सिंह (शुभ)

इंतेज़ार

तुम हो कितनी अनोखी,जब आती फ़िज़ा को

खुबसूरत और शमाँ में अनोखी सी नमी आ जाती।

बस झुल्फों को संभाल कर चलना,

थोड़ा देखभालकर चलना,

मौसम का मिज़ाज़ ना बिगड़ जाये, इसीलिए तो

कहते है हमें भी साथ ले लेकर चलना,

क्या पता हमे फ़राज़ ही मिल जाये।

हर शाम साथ रहे ये जरूरी तो नही, हर सुबह

साथ हो ये जरूरी तो नही, बस तेज़ हवाओ में

साथ रहना ये जरूरी है सही।

रखते हो सब नज़रे तुमपे सही! दिलो में कई

अरमान लिए, उन नज़रो में एक नज़र ऐसी भी,

जिसपे हो बस तेरी नज़र, जिसपे हो बस मेरी नज़र।

जिस राह चल पड़ा था

किस राह चल पड़ा था!

ना था कोई मोड़ ना थी कोई मंज़िल,

जिस राह चल पड़ा था।

कभी दिखे कुछ काटे,

तो कभी पतझड़

अपने ख़यालो में खोया,

खुद ही सवालो को पिरोया,

बस चला जा रहा था,

जिस राह चल पड़ा था।

आ पहुँचा उस जगह जहा दिखे अनेकों लोग,

कुछ सुलझे तो कुछ अपने आप में ही उलझे।

जब लगा जीवन का मोल, हर राह लगा अनमोल,

हर राह एक नयी मंजिल, हर मंजिल में एक नयी राह।

बस चलता रहा जब तक थका नही, जब तक रुका नही।

जिस राह चल पड़ा था।

कैद में आशाएँ

क्यों करते हो कैद ?

वो तो उड़ने को है,

क्यों रखते हो पिंजरे में ?

वो तो उड़ने को है।

गर खोल दो बंदिशो का पिंजरा एक बार,

वो तो दूर गगन में उड़ने को है बेकरार।

जिसकी हसी जंजीरो से हो बधी,

जो खिलखिलाने से दुनिया से हो डरी,

वो खिलखिला के हसने को है।

क्यों करते हो कैद ?

वो तो उड़ने को है।

कही देर ना हो जाए, सिर्फ पिंजड़ा ही रह जाए,

और पंख सारे गिर वही ना रह जाए।

पिंजड़े को ही मान संसार,

दबा दे सारे बुने हुए अपने अरमान।

क्यों करते हो कैद?

वो तो उड़ने को है।